Sunday, July 3, 2016

ट्रैफिक रूल्स & बक्चोदियाँ


किसी नियम को ना मानना हम भारतियों के खून में ठूंस – ठूंस कर भरा है जैसे केजरीवाल के खून में नौटंकी ,यकीन नही होता तो देख लेना कहीं दिवार पर लिखा होगा “यहाँ मूतना मना है “ तो सबसे ज्यादा उसी जगह मूता जायेगा अथार्थ यह एक तरह का निमंत्रण नोट की तरह है ,जिसको ना भी लगा होगा पढकर उसे अंदर का सुलेमानी कीड़ा मूतने पर मजबूर कर देगा ,अगर कहीं बोर्ड लगा होगा “कृपया गाडी  धीरे चलायें आगे गर्ल्स कॉलेज है “ तो कूल डूड वहां आते ही मीटर खींच देंगे और अपने चक्षु लगा बैठते हैं लड़कियों पर इसलिए सामने ब्रेकर पर ओंधे मुह गिरकर अपनी तशरीफ़ तुड़वा लेते हैं ,और कुछ लोग बोर्ड पढ़ते ही गाडी इतना धीरे कर लेंगे की कछुआ भी ओवरटेक कर जाये ,असल में ये महानुभाव नियम नही मान रहे होते हैं लड़कियों को देखकर आँखे हरी कर रहे होते हैं |  और साहब हैलमेट तो यहाँ तभी पहना जाता है जब कोई लड़की पीछे बैठी हो और मुंह छुपाना हो.... इस होड़ में अंकल लोग भी कहा पीछे हटने वाले हैं जिस दिन अपनी दो इंची जुल्फें रंगवा डालते हैं उसी दिन हैलमेट सर की बजाय हाथ में आ जाता है | और पापा की परियां, एंजेल , प्रिंसेस जिनका अपना अलग ही स्टेटमेंट होता है ‘ट्रैफिक रूल्स माय फूट......महाय लाय्फ़ महाय रूल्स’ जिनको हैलमेट पहनाना मतलब घोड़े को खुरताल पहनाना...और जब ये परियां फॉर व्हीलर की सीट पर बैठती हैं तो किसी को सवर्ग की सैर करवा कर मानती हैं, इनका बस चले तो घर में बैठे इन्सान को दूसरा माले पर जाकर टक्कर मार दें | कुछ कम उम्र के बच्चे ऐसा भागते हैं मानो अंड्डे में से चूजा बाहर निकलते ही सड़क पर भाग छूटा हो....जो की  ट्रैफिक पुलिस के टांगों के बीच से निकल जाते हैं और वो तोंद पर हाथ घुमाते हुए लम्बी साँस छोड़ते हैं.....गये 100 रुपये...फिर ट्रैफिक पुलिस के गुस्से का शिकार होते हैं बिना हैलमेट जाने वाले लौंडे जिनका चालान पहले बनता है और बाद में पता लगता है जिसका चालान काटा उसके पास हैलमेट ही नही , बाइक भी नही है वो तो पैदल जा रहा है बेचारा....और बाद जो धक्के चढ़ता है उसपर सारे चार्ज लगा डालते हैं, सीट बेल्ट नही लगाया , बत्ती तोड़ी , हैलमेट नही है, RC नही है ,लाइसेंस नही है ,घर पर आटा नहीं है ,तेल नही है, साबुन नही है.........
ट्रक ड्राईवर तो पैदा ही सिग्नल तोडकर होते हैं जब ये गाड़ी ले कर सड़कों पर उतरते हैं तो लगता है मानो किसी ने बीच सड़क सांड को खुला छोड़ दिया हो ,ऐसे में जब ये हॉर्न भी बजाते हैं तो लगता है माने यमलोक में शंख बज रहा हो....सामने से हट जाओ वरना किसी की जान जाने वाली  
लेकिन सब हंसीं मजाक से परे जिंदगी उपर वाले का दिया सबसे अनमोल तोहफा है, इसे जाया ना करें , अपनों की नजर में अपनी अहमियत समझें जिनको आपके घर के बाहर बाइक लेकर निकलते ही चिंता सताने लगती है...आपकी तेज़ रफ़्तार और लापरवाही आप की नही किसी दुसरे के घरों के भी चिराग बुझा सकती है ....अपना कर्तव्य समझें...ट्रैफिक नियमों का पालन करें ||

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