कीमत...
क्या कीमत होगी
आंसुओं की ?
सोचा है कभी ?
दर्द..
बिक सकता है ?
सोचा है कभी ?
नहीं??
चलो ...
मिडिया की और देखो
किसी बेबस को लाया जाता है
कैमरे के सामने...
माथे की शिकन..
आँखों में दर्द की गहराई..
हर चीज़ पर फोकस !!!
आंसू नहीं आये ..?
जरा जख्म और कुरेदते हैं
बात ना बने
तो दिल पर चोट करते हैं..
यातनाएं देते हैं...
एक से बहतरीन एक
तरीका इजात करते हैं..
माँ से बेटे की मौत पर सवाल
कर
वातसल्य पर हंटर चलते
हैं...
एक विधवा को
भविष्यता से डराते हैं...
उजड़े जो घर किसी का
उसे यादों में उलझाते
हैं...
सिलसिला तब तक चलता है
जब तक आंसू नहीं आते...
फिर आँखों का
क्लोज अप शॉट लेते हैं..
दर्शको को भावुक कर..
आंसुओं को
मोतियों के भाव बेचते
हैं...
उधर-
रियलिटी शो वाले भी
गजब ढाते हैं
बिना आंसुओं के
अच्छे भले शो पिट जाते हैं
हर एक्ट में
किसी के बाप का गुर्दा फ़ैल
करवाते है
तो किसी की
माँ को केंसर बताते हैं...
पीछे इमोशनल बैकग्राउंड
म्यूजिक दे
सबको रुलाते हैं
कोने में बैठे जज
आँखों पर ग्लिसरीन लगा
जबरदस्ती आंसू टपकते है..
जिसका दर्द बड़ा होता है
जो ज्यादा रुलाता है
उसी की कीमत ज्यादा लगाई
जाती है
आंसू,...
दर्द..
सब बिकता है यहाँ !!
Thats the truth
ReplyDeleteसही है, "जो बिकता है वही दीखता है"।
ReplyDeleteदर्द खरीदने के लिए हर कोई तैयार बैठा है
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