उफ !!! फिर वही शाम , फिर वही तनहाई, फिर वही कारवां , कुछ बदलता कहाँ है वक्त के साथ? #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 23, 2014
आवारा पंछी सी है कुछ, यादें उनकी, शाम हुई नहीं कि आशियाना ढूंढ ही लेती हैं #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 22, 2014
ढूंढी हमने खुशबू बोतलों मे कई बार, शायद आज भी नही मिलती बाजार में महक तेरे बालों की ।। #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 22, 2014
किये कितनी दफा कत्ल नजरों से उसने ~ ~कम्बख्त हर बार इल्जाम हम पर ही आया #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 23, 2014
थम गई सांसे मेरे अपनों की, या भुला दिया__ ____हिचकियाँ आये जमाने हो गए_______ #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 24, 2014
चाहते थे तुझमें ढूंढना वजूद हमारा, जो कि फकत इक वहम निकला______ #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 25, 2014
कुछ धुंए सा निकला अंदाज उनका~ जरा हवा लगी जमाने की और रुख बदल लिया।। #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 25, 2014
छुपा लेते हैं कुछ कामयाबियों को अक्सर~ जलते हुए आशियाने अपनों के देखे नहीं जाते #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 21, 2014
अक्सर सो जाता है थककर सख्त जमीन पर, दिनभर जो लोगों के नरम बिस्तर बनाया करता है ।। #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 21, 2014
खो जाते हैं लोग अक्सर मीठी चुस्कियाँ लेने में, छोटू से जिंदगी के कड़वे घूंट की पूछे कौन भला ? #Rajasthaniii pic.twitter.com/wNPZyHdOzq
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 22, 2014
अक्सर सो जाता है थककर सख्त जमीन पर, दिनभर जो लोगों के नरम बिस्तर बनाया करता है ।। #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 21, 2014
साहब के घर बचे खाने से डस्टबीन भर जाता है, बाहर गरीब रोज रोटी के इंतजार में घंटी बजकर भूखा लौट जाता है #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 22, 2014
सिसकता होगा रोज बचपन उसका, कारखाने की खिड़की से ~ स्कूल जाते हमउम्रों को देखकर।।#Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 22, 2014
चलने दो जरा आँधियां हकीकत की~ न जाने कौनसे झौंके में अपनों के मुखौटे उड़ जाएं #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 21, 2014
छेड़कर जमानेभर की लड़कियों को, रोया वो रातभर, जिस रोज घर उसके बिटिया ने जन्म लिया ।। #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 22, 2014
किस्मत का अब उसे मलाल नहीं होता, घंस गई लकीरें बचपन में ही जूठन धोते-धोते #Rajasthaniii pic.twitter.com/xAmwjBLPYy
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 23, 2014
बचपन उसका खुद बेखबर है , उन काले अक्षरों सें, लोगों को जो दूनियाभर की खबरे बांटा करता है #Rajasthaniii
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) September 23, 2014
गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने भला कैसे कह दूं कि "माँ" अनपढ़ है मेरी।।
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) November 5, 2014
किसी ने आँखे भी खोली तो सोने की नगरी में; और..... किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है; pic.twitter.com/BhN4iLU43G
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) August 25, 2014
जो मुल्क के रहनुमा हैं उनसे ये जाके कौन पूछेगा कि क्यूँ गरीब रोटी के लिए,अभी तक इस वतन मैं रोता है ... pic.twitter.com/JjR5RlJVuP
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) August 13, 2014
देखा हमने एक बार फिर उस छोटु को जूते चमकाते, अफसोस आज भी वह नंगे पांव ही था.... pic.twitter.com/aydj560aPY
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) August 14, 2014
ना iPhone है ना ही टीवी.....पर मुस्कुराते हुए चेहरे देखिए........ pic.twitter.com/U2vWTFJJ7K
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) August 14, 2014
पूछता नहीं कोई हाल-ए-दिल तक उस मासूम का, दिनभर जो लोगों को गिलास भर सुकून बांटा करता है.... pic.twitter.com/DoZ2Gq71Wh
— राजस्थानी छोरा (@_Rajasthani_) August 16, 2014
बेहद उम्दा!!
ReplyDeleteशुक्रिया भाई...
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