Friday, September 19, 2014

जब तुम मुस्कराती हो

जब तुम मुस्कराती हो,
वक्त थम सा जाता है,
इन लम्हों की अफरा तफरी
मानो रुक सी जाती है,
दिनभर की परेशानियां,
माथे की शिकन,
भीड़ में कहीं खोई नजरें,
एक जगह ठहर सी जाती हैं
गुम से जाते हैं,
अश्कों में धुले हुए वो लम्हें
 कानों में जादू घोलती
तेरी एक मुस्कराहट
हर जख्म भर देती है,
शायद यही हुनर तो है,
जो तुम्हें सबसे खास बनाए हुए है,

बस फिक्र रहती हैं ,
कभी इस मुस्कुराहट को
नजर ना लगे किसी की।।

3 comments:

  1. बहुत सटीक चित्रण,अतिसुन्दर

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  2. बहुत बढ़िया। तुम तो छुपे रुस्तम निकले :P

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