रखना ख्याल ऐ खुदा
बड़ी मासूम है माशूका मेरी ...
पलकों पर सपने लिए
चली गई है मुझसें दूर कहीं ...
करना है तय सफ़र लम्बा उसे,
और हमराह साथ कोई नहीं ...
लिख देना कांटे हिस्से में मेरे,
जो आयें राह में उसके कहीं ...
देना ठोकरें मुझे लाख भले,
पर भूलें से आये न
पत्थर उसके राह में कहीं ...
सहम जाती है
रात के अँधेरे से वो ,
जुगनुओं से राह रोशन करना,
जो हो अमावस कहीं...
कड़कती बिजलियाँ डराती हैं उसे
देना शाया अपना ,जो हों बारिशें कहीं...
जब मुस्कुराती है
तो खिलखिला उठती हैं खामोशियाँ भी अक्सर,
ना जाये उसके चेहरे की मुस्कान कहीं...
रखना ख्याल ऐ खुदा ,
बड़ी मासूम है माशूका मेरी ...
बेहतरीन। बिना तुकबंदी के जो अहसास उतारे हैं, वाक़ई लाज़वाब हैं। निरंतर लिखते रहिये।
ReplyDeleteशुक्रिया भाई...
Deletebadale badale se najar aate hai vo
ReplyDeleteक्या बात है...सुबह -सुबह बस्ती की चहल -पहल'....
Deleteशुक्रिया गौरव भाई .....
ReplyDeleteWaah Aashiq ho gaya Bhai mera 😊😊 bahut accha likhte ho
ReplyDeletethank U bhai...
DeleteWah kya baat kya baat kya baat , keep it up
ReplyDeletethankU bhai
DeleteKhoob
ReplyDeletethankU.... :)
Deleteawesome yr
ReplyDeleteAwsm Bhai...👌👌
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