उसने आँचल में एक बीज लगाया,
लहू से सींचकर पौधा उगाया,
सहकर हर एक झोंका,
उसे आँधी -तूफानो से बचाया।।
पौधे से पेड़ बनाने में
पूरा जीवन लगाया
जब छूने लगी टहनियाँ आसमान को
कद पर खुद के वो इतराया
जमाकर जड़ें गहरी जमीन में
अश्कों को उसने भूलाया
जम गया पत्थर दिल में यह सोचकर,
बुढ़ापे में सहारे की एक लकड़ी तक
उस पेड़ से न तोड़ पाया।।
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